जी हाँ मेरा तात्पय॔ हाल ही मे हुई पालघर हत्याकाण्ड से है जहाँ दो साधुओ की निम॔म हत्या की गई।यह एक जीता जागता उदाहरण है जिससे पता चलता है कि लोगो मे इंसानियत कही दफन होती जा रही है।परन्तू आज वो बड़े नेता, अभिनेता,अभिनेत्री कहा गए जो एक विशेष समुदाय के हितो के उल्लघंन पर देश विरोधि नारे और सोशल मिडिया के जत्रिए टिप्पणि करते पाए जाते थे। इस देश मे कुछ लोगो को तो बस अल्पसंख्यको की प्रताड़णता ही दिखाई पड़ती है परन्तु बहुसंख्यको के साथ चाहे कुछ भी हो जाए पर उनकी चुप्पी तक नही टूटती।

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